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मेरा मैं भी जब तुझमें हुआ था रवां


शब्दों के पारउस दुनिया की तलाश में
तेरा वजूद ही सब कुछ था जहाँ
मेरा मुझमें क्या रहा था
मेरा मैं भी तो तुझमें हुआ था रवां

शब्द उन काली रातों के जो
संभलते भटकते दिशाहीन गलियों में
जब भोर के शब्दों ने राह दिखाई
कदम बढ़े फिर उस सुबह की तलाश में
जब मेरा मैं तुझमें हुआ था रवां

कभी जहाँ शब्द बसते थे फलक पे
उन्मुक्त स्वछन्द दिन के उजालों से
शब्दों के पाररात के अंधेरों में
अधूरे शब्दों से बुने कुछ सपने
अधूरे अर्थों के वो अपने जो कर गए
मेरे मैं को तुझमें रवां

शब्दों के पारअधूरे सपनों की दुनिया
जीवन का सच मौजूं था जहाँ
तेरा वो वजूद ही सब कुछ था वहां
मेरा मैं भी जब तुझमें हुआ था रवां

चलो न चलें इन शब्दों के पार
कहीं तो होगी वो डोर जहाँ
वो शब्द गुंथे हैं हमारे वजूद के
मेरा क्या रहेगातुम्हारा क्या जायेगा
ये बातें अर्थ खो देंगी
जीवन को अर्थ मिलेगा जहाँ
मेरा मैंतेरा मैं .. हम होंगे खुद में रवां
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