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कदम जहाँ चले थे, फिर चल पड़े!


जब मैंने खुद को सुना था 
 जिंदगी मैं मैं ही था 
जब मैंने तुझे सुना 
उस वक़्त भी मैं मैं ही था 
हाँ ख्यालों से कुछ बेख्याली जरूर थी 
पर वो मेरा मैं 'मैंनहीं था 
जब तू मेरे काफिले के हाशिये पे थी 
कुछ गुमां भी  हुआ 
और वही मेरा मैं 'मैंहो गया 
जब मैं जिंदगी 
तेरे छलावे में  गया 
हम से वो मैं का फासला 
मेरे मैं से तेरे 'मैंका रास्ता 
और कुछ अनसुनी 
पर आवाज़ देती चीखें 
भटका चला जा रहा था 
तेरे भुलावे में 
जब तेरी बेवफाई ने फिर से दस्तक दी 
पर तुझे क्या लगा
मेरे शख्श को मुझीसे जुदा करना 
कभी तेरे बस में रहा ही नहीं 
मैं तो भुलावे में कुछ दूर चला 
पर  जिंदगी 
तू तो भुलावे में बहती ही रही 
मैं वहीँ थामेरा मैं वहीँ था 
हाँ, इस भटकाव ने कुछ नए पैमाने गढ़े 
रास्ते फिर से मिले
कदम जहाँ चले थे, फिर चल पड़े! 
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